वृंदावन-बरसाना:
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पावन अष्टमी तिथि के अवसर पर आराध्या श्री राधा रानी का जन्मोत्सव ब्रजभूमि में अभूतपूर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बरसाना के ऐतिहासिक श्रीजी मंदिर की ऊंची अट्टालिकाओं से लेकर वृंदावन के कण-कण में सिर्फ ‘राधे-राधे’ का महामंत्र गूंज रहा है। भोर की पहली किरण के साथ ही समूचा ब्रजमंडल भक्ति के सागर में सराबोर नजर आ रहा है और देश-विदेश से उमड़े लाखों श्रद्धालु इस आलौकिक पल के साक्षी बन रहे हैं。


फूलों का अनूठा श्रृंगार और 27 द्रव्यों से मूल शांति अनुष्ठान

उत्सव की शुरुआत बरसाना के लाड़ली जी मंदिर में तड़के शुरू हुई। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री राधा रानी का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था, जिसके निवारण के लिए इस बार मंदिर के गर्भगृह में विशेष ‘मूल शांति’ अनुष्ठान किया गया। इस वैदिक प्रक्रिया में:

  • 27 पवित्र कुओं का जल, 27 अलग-अलग वृक्षों की पत्तियां और 27 औषधियों का उपयोग कर महापूजा संपन्न की गई।
  • इसके ठीक बाद भोर में गोस्वामी समाज द्वारा मंगल गायन के बीच भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसकी एक झलक पाने के लिए भक्तों की कतारें मीलों तक फैली रहीं।

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन और राधारमण मंदिर की सजावट देखते ही बन रही है। रंग-बिरंगे विदेशी फूलों, मखमली पोशाकों और हीरे-जवाहरात से सजे विग्रहों की आभा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही है।


‘अरबी की सब्जी’ और ‘छप्पन भोग’ का लगा विशेष नैवेद्य

राधाष्टमी के इस पावन मौके पर ब्रज की रसोइयों में श्रीजी का पसंदीदा और विशेष पारंपरिक भोग तैयार किया गया है। मान्यता है कि राधा रानी को अरबी की सब्जी (अंकोचा) और अरबी से बने पकवान बेहद प्रिय हैं, इसलिए आज के दिन ब्रज के हर घर और मंदिर में बिना लहसुन-प्याज के इस खास भोग को तैयार कर कन्हाई की लाड़ली को अर्पित किया गया। इसके साथ ही माखन-मिश्री, मलाईदार रबड़ी, शुद्ध घी में सिके मालपुए और छप्पन भोग का नैवेद्य भी लगाया गया है।


मध्याह्न काल का महामुहूर्त: इस समय करें घर पर आराधना

शास्त्रों के अनुसार, श्री राधा रानी का प्राकट्य दोपहर (मध्याह्न) के समय हुआ था, इसलिए दिन के इस भाग में की गई पूजा को सर्वोत्तम माना जाता है। यदि आप घर पर पूजन कर रहे हैं, तो उदया तिथि के अनुसार आज के सबसे शुभ समय का ध्यान रखें:

विशेष घटनाक्रमनिर्धारित शुभ समय
मध्याह्न पूजा का महामुहूर्तसुबह 11:01 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक
लाभ और अमृत चौघड़ियादोपहर 01:46 बजे से शाम 04:50 बजे तक

भक्तों के लिए सलाह: सुबह 09:11 से 10:43 बजे तक राहुकाल रहेगा, इस दौरान नई पूजा या कलश स्थापना की शुरुआत करने से बचें।


राधा अष्टमी व्रत का आध्यात्मिक महत्व और महाफल

सनातन परंपरा में श्रीकृष्ण की भक्ति तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उसमें राधा नाम न जुड़ा हो। इस पावन दिन व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक राधा-कृष्ण की युगल छवि का पूजन करने से भक्तों को ये फल प्राप्त होते हैं:

  • अक्षय पुण्य की प्राप्ति: इस दिन किया गया दान, जप और तप कभी नष्ट नहीं होता।
  • घर में सुख-ऐश्वर्य का वास: राधा जी को साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, उनकी कृपा से जीवन से दरिद्रता दूर होती है और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है।
  • परम पद की प्राप्ति: जो भक्त राधा नाम की शरण में जाते हैं, उन्हें भगवान श्री हरि विष्णु और कृष्ण की सहज कृपा मिल जाती है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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