पाकअधिकृतe कश्मीर (PoK) में पिछले कई हफ्तों से चल रहा नागरिक असंतोष अब एक बड़े मानवीय संकट में बदल गया है। पाकिस्तानी सेना के हिंस्र दमन, आटे की भारी किल्लत और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से तंग आकर यहाँ के नागरिकों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं ने नई दिल्ली से अपील की है कि वे नियंत्रण रेखा (LoC) को खोलें ताकि संकटग्रस्त जनता को भोजन और जीवन रक्षक दवाइयाँ मिल सकें।
क्षेत्र में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले लोग महीनों से आसमान छूती महंगाई, बिजली संकट और अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इस शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिसके कारण स्थानीय अस्पतालों में दवाइयों और बाजारों में राशन की भारी कमी हो गई है। विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई सीधी गोलीबारी में अब तक कई मासूम नागरिकों की जान जा चुकी है।
इस भीषण अत्याचार के बीच, PoK की जनता अब खुलकर भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। स्थानीय प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पाकिस्तान सरकार के इस दोहरे और दमनकारी रवैये के साथ और नहीं जी सकते। वे सीमा पार भारतीय जम्मू-कश्मीर में हो रहे तेज आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और शांतिपूर्ण माहौल से बेहद प्रभावित हैं।
इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि PoK में भड़का यह आक्रोश पाकिस्तान के दशकों लंबे शोषण और प्रशासनिक दमन का सीधा नतीजा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस क्षेत्र में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह जवाबदेह ठहराएं।
