सैन फ्रांसिस्को / नई दिल्ली:
सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) ने अपने वैश्विक कार्यबल में एक बार फिर बड़ी कटौती की घोषणा की है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी ने पुनर्गठन (Restructuring) के तहत आज सुबह तड़के करीब 4:00 बजे दुनिया भर से 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। कंपनी ने छंटनी की आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले सभी कर्मचारियों को अचानक ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम करने) का ईमेल भेजा, जिसके बाद इस फैसले की पुष्टि की गई।
आखिर मेटा ने क्यों लिया यह फैसला?
- एआई (AI) पर पूरा फोकस: कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने स्पष्ट किया है कि मेटा अब अपना पूरा ध्यान और निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और बड़े भाषा मॉडल (LLMs) के विकास पर केंद्रित कर रही है।
- पारंपरिक विभागों में कटौती: एआई के बजट को बढ़ाने के लिए कंपनी ने अपने पारंपरिक और कम मुनाफे वाले विभागों, जैसे मानव संसाधन (HR), प्रशासनिक सेवाओं और कुछ तकनीकी विकास टीमों के बजट में भारी कटौती की है।
- दक्षता का वर्ष (Year of Efficiency): मेटा ने अपनी वित्तीय रिपोर्ट में संकेत दिया है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और एआई चिप्स (जैसे एनवीडिया) की बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था।
कर्मचारियों और बाजार पर क्या हुआ असर?
इस अचानक आए फैसले से मेटा के वैश्विक दफ्तरों में हड़कंप मच गया है, जिसमें भारत में काम करने वाले कई टेक प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं। हालांकि, प्रभावित कर्मचारियों को कंपनी की नीति के अनुसार कुछ महीनों का सेवरेंस पैकेज (Severance Package) और स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। दूसरी ओर, एआई पर ध्यान केंद्रित करने की इस रणनीति के बाद वॉल स्ट्रीट और शेयर बाजार में मेटा के शेयरों में उछाल देखा जा रहा है। टेक विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी दर्शाती है कि अब सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियां इंसानी श्रम की जगह पूरी तरह से ऑटोमेशन और एआई को तरजीह दे रही हैं।
