वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। अमेरिका ने भारत से तस्करी कर ले जाए गए 657 बेशकीमती पुरावशेषों (Antiquities) को आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को लौटा दिया है। इन कलाकृतियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुल कीमत लगभग 1.4 करोड़ डॉलर (करीब 117 करोड़ रुपये) आंकी गई है।
- हस्तांतरण समारोह: न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष समारोह में अमेरिकी अधिकारियों ने इन पुरावशेषों को भारतीय महावाणिज्य दूतावास को सौंपा। यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपदा की रक्षा के लिए हुए द्विपक्षीय समझौते के तहत उठाया गया है।
- कलाकृतियों का कालखंड: लौटाई गई वस्तुओं में 11वीं से लेकर 14वीं शताब्दी के बीच की दुर्लभ मूर्तियां, नक्काशीदार पत्थर और टेराकोटा की कलाकृतियां शामिल हैं। इनमें से कई मूर्तियां दक्षिण भारत के मंदिरों से चोरी की गई थीं।
- सुभाष कपूर का कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि इनमें से अधिकांश कलाकृतियां कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर के नेटवर्क के जरिए अवैध रूप से अमेरिका पहुँचाई गई थीं, जिसे बाद में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी ने जब्त किया।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया:
संस्कृति मंत्रालय ने इसे एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अब तक सैकड़ों कलाकृतियां विदेशों से वापस लाई जा चुकी हैं, जो भारत की विरासत को वापस घर लाने के प्रयासों को दर्शाता है।
आगे क्या होगा?
इन सभी 657 पुरावशेषों को जल्द ही एक विशेष विमान से भारत लाया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इनकी जांच करेगा और फिर इन्हें देश के विभिन्न संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जाएगा।
